top of page

"धमतरी में राहुल गांधी का 'मास्टरस्ट्रोक' "32 दाँतों के बीच की ज़ुबान" जैसा नेता चाहिए: ऑब्जर्वर रेयाना रियाज चिश्ती 'छत्रपों' को किनारे कर जनता के नेता की तलाश में जुटीं ऑब्जर्वर रेयाना रिजाज

कुरूद।


कांग्रेस हाईकमान राहुल गांधी अब संगठन को नए ढर्रे पर खड़ा करने की जुगत में हैं। इसी सिलसिले में शुरू हुआ "संगठन सृजन अभियान" धमतरी जिले में सियासी भूचाल ले आया है।

अब तक धमतरी कांग्रेस में संगठन की बागडोर अक्सर "बड़े नामों" या "छत्रप नेताओं" के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इस बार समीकरण बदल रहे हैं।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा भेजी गई ऑब्जर्वर और पूर्व मंत्री रेयाना रियाज चिश्ती, जिला प्रभारी गुरुदयाल बंजारे के साथ मिलकर इस अभियान को नई दिशा दे रही हैं।




कुरूद की अहम बैठक – गुटबाजी पर बेबाक राय


6 अक्टूबर को कुरूद के ऐतिहासिक काली मंदिर में कार्यकर्ताओं और दावेदार नेताओं के बीच हुई वन-टू-वन चर्चा ने माहौल गरमा दिया।

इस बैठक में जब मीडिया ने गुटबाजी और दावेदारों की भीड़ पर सवाल किया, तो रेयाना रिजाज

चिश्ती ने बिना लाग-लपेट जवाब दिया। उन्होंने कहा—


"गुटबाजी हर जगह होती है, यह खत्म नहीं हो सकती। लेकिन हमें ऐसा नेता चाहिए जो 32 दाँतों के बीच ज़ुबान की तरह सबको साध सके और जनता की आवाज़ बने।"


उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि संगठन का फोकस इस बार “सबको जोड़ने” वाले नेता पर है, न कि किसी गुट या छत्रप की पकड़ वाले चेहरे पर।





राहुल गांधी की मंशा: जनता का असली प्रतिनिधि


रेयाना चिश्ती ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी अब "छत्रप राजनीति" को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनका कहना था—


"अब फोकस ऐसे नेताओं पर है जो सर्वसमाज से संवाद करें, जनता की सुविधाओं और समस्याओं को समझें और कांग्रेस को जमीनी स्तर पर खड़ा करें। यही राहुल गांधी की मंशा है।"


यानी, यह चुनाव केवल नया जिलाध्यक्ष तय करने का मामला नहीं है, बल्कि राहुल गांधी की सोच का पहला "लाइव टेस्ट" भी है।





दावेदारों की बाढ़—कमज़ोरी नहीं, ताक़त


धमतरी में जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए इस बार दावेदारों की संख्या अप्रत्याशित रूप से ज्यादा है।

रेयाना चिश्ती ने इसे कमजोरी मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा—


"बहुत अच्छी स्थिति में कांग्रेस है। इसीलिए दावेदार ज्यादा हैं। जब संगठन मजबूत होता है और भविष्य में सत्ता की उम्मीद होती है, तभी इतनी बड़ी संख्या में लोग सामने आते हैं।"


उनके इस बयान से कार्यकर्ताओं में नया उत्साह दिखा। यह साफ संकेत है कि कांग्रेस धमतरी में खुद को मज़बूत स्थिति में मान रही है।






​किसान पृष्ठभूमि को प्राथमिकता: संगठन का 'फार्मूला'

​यह देखते हुए कि धमतरी जिला एक किसान क्षेत्र है और कांग्रेस के अधिकांश नेता कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं, ऑब्जर्वर रिजाज इस बात को महत्वपूर्ण मान रही हैं। यह संकेत देता है कि पार्टी किसी ऐसे व्यक्ति को कमान सौंप सकती है जिसकी जमीन से जुड़ी पहचान हो।

​रिजाज का जमीनी निरीक्षण भी इसी बात की पुष्टि करता है। वे गांवों में जाकर सीधे फसलों के दाम, मजदूरी, और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे जनमानस को 'टच करते हुए' मुद्दों पर बात कर रही हैं। इस गहन प्रक्रिया के तहत, संगठन यह जांच रहा है कि कौन सा नेता वास्तव में कार्यकर्ताओं से रूबरू होता है और उनकी पूछ-परख करता है।


गुटबाजी और समीकरण – बड़ी चुनौती


धमतरी कांग्रेस की सियासत हमेशा से गुटबाजी और आपसी खींचतान से प्रभावित रही है। यही वजह है कि जिलाध्यक्ष का पद यहां सबसे विवादित माना जाता है।

रेयाना चिश्ती ने हालांकि साफ कर दिया है कि गुटबाजी खत्म नहीं हो सकती, लेकिन एक सक्षम नेता ऐसा ज़रूर हो सकता है जो सभी धड़ों को साधकर कांग्रेस को एकजुट कर दे।

उनकी “32 दाँतों के बीच ज़ुबान” वाली उपमा दरअसल इसी जटिल समीकरण को बयान करती है।




जनता और कार्यकर्ताओं में चर्चा


धमतरी और कुरूद में इस अभियान को लेकर जबरदस्त चर्चा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर कांग्रेस वाकई जनता से जुड़े हुए नेता को जिलाध्यक्ष बनाए, तो पार्टी को बड़ा फायदा होगा।

वहीं दावेदार नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है। हर कोई यह जताने में लगा है कि वही “जनता का असली नेता” है।





नतीजा क्या होगा?


अब सबकी निगाहें धमतरी कांग्रेस के इस प्रयोग पर टिकी हैं। यह चुनाव केवल जिला अध्यक्ष के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि राहुल गांधी के “नए कांग्रेस मॉडल” की पहली असली परीक्षा है।

क्या सचमुच “छत्रप संस्कृति” को तोड़कर जनता का नेता चुना जाएगा?

या फिर परंपरागत समीकरण ही दोहराए जाएँगे?



👉 सवाल अब सीधा जनता और कार्यकर्ताओं के बीच है:

क्या कांग्रेस को मिलेगा ऐसा जिलाध्यक्ष जो 32 दाँतों के बीच ज़ुबान की तरह सबको साध सके?

Comments


bottom of page