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बेसरम की लकड़ी से सद्बुद्धि यज्ञ: कुरूद कांग्रेस का हिंदू रीति-रिवाज से 'अनोखा विरोध'

कुरूद, छत्तीसगढ़। 

यह देश की वही कांग्रेस पार्टी है, जिसके नेताओं के बयान अक्सर सनातन धर्म और हिंदू रीति-रिवाजों को लेकर आग लगाते रहे हैं और जिस पर तीखे सवाल उठते रहे हैं। विडंबना देखिए, सोमवार को इसी पार्टी के पार्षद कुरूद की सड़कों पर 'सद्बुद्धि यज्ञ' का ढोंग रच रहे हैं। नगर प्रशासन को जगाने के लिए कांग्रेस ने 'यज्ञ' जैसे पवित्र अनुष्ठान को विरोध का मंच बनाया, लेकिन यज्ञ में 'बेशरम की लकड़ी' का इस्तेमाल करना कांग्रेस की दोगली नीति और घोर सियासी अवसरवादिता को बेनकाब करता है। जिस पार्टी के मुंह में सनातन विरोधी जहर भरा हो, उसका इस तरह हिंदू रीति-रिवाज का सहारा लेना, जनता के मन में यह सवाल पैदा करता है कि क्या यह 'सद्बुद्धि यज्ञ' प्रशासन के लिए है या खुद कांग्रेस के लिए सद्बुद्धि की माँग है?

​यह प्रतीकात्मक विरोध नगर प्रशासन की 'बेशर्मी' को उजागर करने के लिए किया गया, लेकिन यज्ञ के लिए बेशरम के फूल और लकड़ी का इस्तेमाल कांग्रेस की राजनीतिक मजबूरी और सनातन के प्रति घिनौने दोहरे रवैये को दर्शाने के लिए काफी है—एक ओर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए सनातन पर आक्रामक रुख, दूसरी ओर स्थानीय राजनीति साधने के लिए उसी हिंदू रीति-रिवाज का मंचन। कुरूद की जनता पूछ रही है: कांग्रेस की सद्बुद्धि दिल्ली में मरी या कुरूद में जगी?

"जमीर दब जाए—तब हवन सामग्री नहीं, बेशरम के फूल चाहिए!"

​हालांकि कांग्रेस पार्षद इस यज्ञ को प्रशासन की 'बेशर्मी' से जोड़ रहे हैं, लेकिन उनकी यह धार्मिक नौटंकी खुद सवालों के घेरे में है।

​विरोध प्रदर्शन के दौरान, नगर पालिका उपाध्यक्ष देवव्रत साहू ने प्रशासन पर सीधा और भावनात्मक हमला बोला। उन्होंने कहा, "जब आँखों पर सत्ता की पट्टी बंध जाती है, जब कान जनता की चीख न सुनें, जब कुर्सी इतनी भारी हो जाए कि ज़मीर दब जाए—तब हवन सामग्री नहीं, बेशरम के फूल चाहिए! आज हम सद्बुद्धि यज्ञ कर रहे हैं उन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए जिनकी संवेदना मर चुकी है। यह यज्ञ आग का नहीं, जनता के गुस्से का है। यह धुआँ लकड़ी का नहीं, नगर प्रशासन की नींद उड़ाने का है।"

​साहू ने चेतावनी दी कि बेशरम के फूल इस बात का प्रतीक हैं कि "अब भी अगर नहीं जागे, तो कुरूद की जनता माफ़ नहीं करेगी।"

नगर प्रशासन पर तानाशाही और 'कॉम्प्लेक्स प्रेम' का आरोप

​नेता प्रतिपक्ष डुमेश साहू ने नगर प्रशासन के तानाशाही रवैये पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि "नगर पालिका प्रशासन सोई हुई है। आम जनमानस की बातों को नजरअंदाज करना इनके तानाशाही रवैये को प्रदर्शित करती है। कुरूद की जनता के तकलीफ और पीड़ा से इनको कोई सरोकार नहीं है। सिर्फ कॉम्प्लेक्स बनाने और बेचने की नीति के अलावा इनके पास कोई और सोच है नहीं।"

​साहू ने अध्यक्ष के प्रति अविश्वास का माहौल होने की बात कही और चेतावनी दी कि जब तक उनकी जनहित की माँगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन जारी रहेगा।

​धरना प्रदर्शन को ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष आशीष शर्मा और युवा नेता दिवाकर चंद्राकर ने भी संबोधित किया। इस विरोध में नगर पालिका उपाध्यक्ष देवव्रत साहू, नेता प्रतिपक्ष डूमेश साहू, वरिष्ठ पार्षद रजत चंद्राकर, मनीष साहू, मंजू साहू, उत्तम साहू, राखी चंद्राकर, उर्वशी चंद्राकर, अर्जुन ध्रुव सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रहलाद चंद्राकर, रामेश्वर साहू, शिवदत्त तिवारी, प्रमोद साहू, राघवेंद्र सोनी, चुम्मन दीवान, मनोज अग्रवाल, दिवाकर चंद्राकर, पंकज जोशी, पप्पू राजपूत, लेखराम साहू, अशोक साहू और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

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