मॉडल स्कूल नारधा: शिक्षक छगन लाल साहू ने बदली सरकारी स्कूल की सूरत
- moolchand sinha

- 5 days ago
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[कुरूद/नारधा]:
कहते हैं कि यदि गुरु के भीतर कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो वह पत्थर में भी प्राण फूंक सकता है। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गाँव नारधा ( मगरलोड ) में यह कहावत धरातल पर चरितार्थ हुई है। यहाँ के शासकीय विद्यालय ने जर्जरता की बेड़ियों को तोड़कर 'मॉडल स्कूल' का जो चोला ओढ़ा है, उसकी चमक आज पूरे प्रदेश में मिसाल बन गई है। इस भगीरथ प्रयास के केंद्र में हैं— राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक एवं प्रधानपाठक छगन लाल साहू।
शिक्षक छगन लाल साहू का विजन और 5 वर्षों का कड़ा संघर्ष
नारधा के इस साधारण स्कूल का 'मॉडल स्कूल' बनने का सफर रातों-रात तय नहीं हुआ। इसके पीछे पाँच वर्षों की अनवरत तपस्या छिपी है। छगन लाल साहू ने केवल कक्षा के भीतर ही शिक्षा नहीं दी, बल्कि स्कूल की घंटी बजने के बाद उनका असली मिशन शुरू होता था। उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। उनके इसी 'व्यक्तिगत चिंतन' और 'सामुदायिक जुड़ाव' ने गाँव वालों के मन में वह विश्वास जगाया, जिससे जन-सहयोग का कारवां बनता चला गया।
"यदि शिक्षक का विजन स्पष्ट हो और इरादे नेक, तो सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय बदलाव संभव है।"
दीवारें बोलती हैं, मूर्तियाँ संस्कार देती हैं
विद्यालय की चौखट पर कदम रखते ही आपको एक अलग जीवंतता का अनुभव होता है। स्कूल की बाहरी दीवारों पर उकेरी गई राज्य की समृद्ध कला-संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण के संदेश और देशभक्ति से ओतप्रोत चित्र यहाँ आने वाले हर आगंतुक का मन मोह लेते हैं।
राष्ट्रप्रेम की सीख: विद्यालय प्रांगण में स्थापित भारत माता की प्रतिमा और दोरनापाल के शहीद ललित दीवान की आदमकद मूर्ति बच्चों के कोमल मन में राष्ट्रभक्ति के बीज बो रही है।
"आज हम बात कर रहे हैं मॉडल स्कूल नारधा की, जिसे शिक्षक छगन लाल साहू ने अपनी मेहनत से संवारा है।"
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: यह स्कूल किसी निजी कॉन्वेंट से कम नहीं है। यहाँ बच्चों के लिए उत्तम फर्नीचर, शुद्ध पेयजल हेतु वाटर कूलर, सुसज्जित ग्रंथालय और आधुनिक स्मार्ट टीचिंग रूम की सुविधा उपलब्ध है।
क्यों हर शिक्षक के लिए मिसाल है 'नारधा मॉडल स्कूल'?
विजय दीप जी के शब्दों में कहें तो, एक शिक्षक के जीवन की सार्थकता इसी में है कि वह समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े गरीब और मजदूर वर्ग के बच्चों को एक उज्ज्वल भविष्य दे सके। छगन लाल साहू ने न केवल स्कूल की इमारत बदली है, बल्कि उन बच्चों की तकदीर बदलने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।
यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के समस्त शिक्षक समुदाय के लिए एक प्रेरणापुंज है। यह कहानी हमें सिखाती है कि "सोच अगर सकारात्मक हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है।"
"नारधा का यह मॉडल स्कूल और शिक्षक छगन लाल साहू का समर्पण आज हर किसी के लिए मिसाल है।"




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