मोटू-पतलू’ नहीं, बच्चों को दें शिवाजी के संस्कार कुरुद हिंदू सम्मेलन में युवराज पांडे महाराज का ओजस्वी शंखनाद
- moolchand sinha

- Dec 30, 2025
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कुरुद (छत्तीसगढ़)।
डिजिटल युग की चकाचौंध में क्या हमारी आने वाली पीढ़ी संस्कारों से दूर होती जा रही है? क्या मोबाइल स्क्रीन ने राम, कृष्ण और शिवाजी की कहानियों को घरों से बाहर कर दिया है? इन्हीं ज्वलंत सवालों के बीच कुरुद में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन एक वैचारिक जागरण बनकर उभरा—जहाँ धर्म, संस्कृति और राष्ट्रबोध का स्वर एक साथ गूंजा।
महाराज युवराज पांडे का 'डिजिटल प्रहार': "स्मार्टफोन नहीं, शास्त्र थमाएं"
सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और प्रखर कथावाचक युवराज पांडे महाराज ने आधुनिक परवरिश की विसंगतियों पर तीखा कटाक्ष करते हुए जनसमूह को झकझोर दिया। उनके संबोधन के कुछ ऐसे बिंदु जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं:
कार्टून बनाम संस्कृति: महाराज जी ने कहा, "आज के बच्चे 'मोटू-पतलू' और 'निंजा हथौड़ी' के डायलॉग तो रट लेते हैं, लेकिन जब राम और शिवाजी की बात आती है तो वे मौन हो जाते हैं। माता-पिता को सोचना होगा कि वे अपने बच्चों को मनोरंजन का दास बना रहे हैं या राष्ट्र का रक्षक।"
मातृशक्ति की जिम्मेदारी: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक माँ ही घर को संस्कार की पाठशाला बना सकती है। यदि माँ संकल्प ले ले, तो घर-घर में राम और कृष्ण जैसी विभूतियाँ जन्म लेंगी।
अनुशासन ही स्वतंत्रता: उन्होंने युवाओं को चेतावनी दी कि बिना संस्कार की स्वतंत्रता समाज के पतन का मार्ग है। अनुशासित जीवन ही व्यक्ति और राष्ट्र को महान बनाता है।
🚩 RSS का शताब्दी संकल्प: 100 वर्ष की यात्रा और भविष्य का भारत
मुख्य वक्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख दीपक विस्फुते ने संघ के शताब्दी वर्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उस स्वप्न को याद किया जिसमें भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प था। उन्होंने कहा, "मानसिक गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर ही हम एक अखंड भारत का निर्माण कर सकते हैं। हमारा हर कार्य राष्ट्र को समर्पित होना चाहिए।"
पंच परिवर्तन: सोच बदलें, समाज बदलेगा
वक्ता खिलेश्वरी किरण ने 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से समाज की वर्तमान चुनौतियों का विश्लेषण किया। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
गर्भ संस्कार: गायत्री परिवार के अभियान के तहत पीढ़ी को जन्म से ही संस्कारित करना।
स्वावलंबी जीवन: राजनीति की बैसाखियों को छोड़कर कर्मठ और परिश्रमी बनना।
संयुक्त परिवार की वापसी: टूटते परिवारों को बचाने के लिए बड़ों के सम्मान की पुनर्स्थापना।
समरसता: ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर संगठित हिंदू समाज का निर्माण।
आयोजन की भव्यता और जनभागीदारी
संयोजक दक्षनेंद्र गिरी, सहसंयोजक हरिशंकर सोनवानी धनेश्वर निर्मलकर जितेंद्र चंद्राकर दुगेश साहू जय प्रकाश साहू और नेमीचन्द्र बैंस के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन में कुरुद और आसपास के हजारों लोग साक्षी बने। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और 'परिवर्तन गीतों' ने वातावरण को राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।
इस अवसर पर क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक जैसे हरिओम शर्मा, ठाकुर राम, अजय चंद्राकर, निरंजन सिन्हा ज्योति भानु चंद्राकर मोहन साहू, और हजारों अन्य कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।
बड़ी बात: यह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आधुनिकता की चकाचौंध में खो रहे हिंदू समाज के लिए एक 'अलार्म' की तरह था।







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