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सर्द हवाओं के बीच कुरूद में ‘दोहरी गर्माहट’ — पायलट का ऐतिहासिक स्वागत और जिला अध्यक्ष दावेदारी की हलचल ने राजनीतिक माहौल उबाल दिया


कुरूद।

सर्द हवाएँ अपनी रफ्तार में थीं, लेकिन कुरूद की राजनीति ने ऐसा पारा चढ़ाया कि मौसम भी उलझन में पड़ गया—“ठंड है या चुनावी गर्मी?”


एक तरफ पहले दावेदार का स्वागत इतना कलेवा-भरपूर था कि ठेठरी, खुरमी और भाजी तक समझ नहीं पाए कि ये नाश्ता है या दावेदारी का प्रमाण-पत्र!

उधर दूसरे दावेदार पीछे क्यों रहते—उन्होंने पूरा छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंच ही खड़ा कर दिया।

पंथी नृत्य, ढोल-नगाड़े, और सिर पर खुमरी… देखकर लगा मानो दावेदारी नहीं, छत्तीसगढ़ महोत्सव का प्रीव्यू चल रहा हो।


दोनों स्वागत मिलकर एक ही बात साबित कर गए


यहाँ कुरूद में दावेदार बदलते हैं, पर राजनीति का पारा… और स्वागत का खर्च—कभी नीचे नहीं आता।

पायलट के आगमन ने कुरूद-मरौद को बनाया ऐतिहासिक मंच


मरौद टोल नाका से लेकर काली मंदिर यार्ड तक की सड़कें बुधवार को सिर्फ रास्ते नहीं रहीं, बल्कि लोगों, नारों, उम्मीदों और विरोध के स्वर से गूंजता हुआ एक विशाल राजनीतिक मंच बन गईं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और धनेंद्र साहू सहित कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व जब सचिन पायलट के साथ पहुँचा, तो ऐसा स्वागत हुआ जो वर्षों तक याद रखा जाएगा।


मरौद से काली मंदिर यार्ड: संस्कृति, श्रद्धा और सज्जा का जादू


पंथी नृत्य और खुमरी से अभूतपूर्व स्वागत


पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष तपन चंद्राकर के नेतृत्व में मरौद टोल नाका पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ पंथी नृत्य की भव्य प्रस्तुति दी।

सचिन पायलट सहित सभी वरिष्ठ नेताओं को खुमरी पहनाकर और फूल-मालाओं से सम्मानित कर क्षेत्रवासियों ने छत्तीसगढ़ी परंपरा का सर्वोच्च आदर प्रस्तुत किया।


छत्तीसगढ़ी थाली का स्वाद — संस्कृति का सच्चा प्रतीक

काली मंदिर यार्ड में प्रदेश सचिव तारिणी नीलम चंद्राकर की विशेष मेजबानी में नेताओं को ठेठरी, खुरमी, अरसा, चेच भाजी और लाल भाजी से सजी विशेष छत्तीसगढ़ी थाली भेंट की गई।

यह सिर्फ आतिथ्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा का स्वाद था, जिसने शीर्ष नेतृत्व को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का सजीव अनुभव कराया।


दूसरी ओर—कुरूद में जिला अध्यक्ष पद की दौड़ ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान


इसी दिन कुरूद विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक हलचल का एक और केंद्र रहा—जिला अध्यक्ष पद की दावेदारी।

सर्द मौसम के बावजूद जहां-जहां दावेदार पहुँचे, वहां-वहीं


फूल-मालाएँ,


समर्थकों की भीड़,


ढोल-ताशों की आवाज़

ने यह साफ कर दिया कि कुरूद की राजनीति ठंड में नहीं जमती, बल्कि अपने मौसम खुद तय करती है।



ठंड में भी गर्मी क्यों?


स्थानीय कार्यकर्ताओं और दावेदारों की सक्रियता ने संगठनात्मक चुनावों को लगभग चुनावी बिगुल जैसा स्वरूप दे दिया है।

कार्यक्रमों में बढ़ती भीड़ और बढ़ता समर्थन इस बात का संकेत हैं कि

संगठन के भीतर भी उतना ही उत्साह है जितना मैदान की राजनीति में।



समग्र तस्वीर — एक दिन में दो ऊर्जाएँ, कुरूद का बढ़ता राजनीतिक असर


एक ओर पायलट का ऐतिहासिक स्वागत और सांस्कृतिक भव्यता, दूसरी ओर दावेदारों का शक्ति-प्रदर्शन—

इन दोनों घटनाओं ने मिलकर यह स्पष्ट कर दिया है कि कुरूद क्षेत्र इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में है।


सर्द हवाओं के बीच बुधवार का दिन यह साबित कर गया कि

राजनीति ही वह आग है, जो मौसम बदल दे — और कुरूद उसी आग से तप रहा है।

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