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बारिश का पानी अब नहीं जाएगा बेकार! वीबी-जी रामजी योजना से कुकरेल में 200+ फार्म पॉन्ड, मछली पालन से आय की नई राह

1 day ago
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वीबी-जी रामजी योजना के तहत कुकरेल में बने फार्म पॉन्ड में मछली पालन

धमतरी/कुकरेल, 9 सितंबर 2026।

कभी बारिश का पानी खेतों से बहकर निकल जाता था और पानी की जरूरत के समय किसान अतिरिक्त जल स्रोत तलाशते थे। अब इसी बारिश के पानी को वीबी-जी रामजी योजना के तहत सहेजकर ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के कुकरेल क्लस्टर में बने 200 से अधिक कुकरेल फार्म पॉन्ड जल संरक्षण के साथ मछली और झींगा पालन के जरिए ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय की नई संभावना तैयार कर रहे हैं।

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वीबी-जी रामजी योजना से कुकरेल में 200 से अधिक फार्म पॉन्ड तैयार

कुकरेल क्लस्टर में वीबी-जी रामजी योजना के तहत अब तक 200 से अधिक फार्म पॉन्ड यानी डबरियों का निर्माण किया गया है। प्रत्येक डबरी का आकार लगभग 20 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 3 मीटर गहरा बताया गया है।

इन जल संरचनाओं का उद्देश्य बारिश के पानी को स्थानीय स्तर पर रोककर उसका उपयोग करना है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए एक अतिरिक्त जल स्रोत मिलता है और वर्षा जल के बेहतर प्रबंधन की संभावना बढ़ती है।

यही कुकरेल फार्म पॉन्ड मॉडल की खासियत है—जल संरक्षण को केवल पानी रोकने तक सीमित न रखकर उसे खेती और आजीविका से जोड़ना।

कुकरेल फार्म पॉन्ड में मछली पालन से खुली अतिरिक्त आय की राह

फार्म पॉन्ड बनने के बाद इनका उपयोग केवल जल संरक्षण के लिए नहीं किया जा रहा है। डबरियों में आईएमसी (Indian Major Carp) और झींगा पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रत्येक फार्म पॉन्ड में करीब 320 आईएमसी और 1600 झींगा के बीज डाले गए हैं। बेहतर देखरेख और प्रबंधन के चलते आईएमसी मछलियां अब लगभग 400 से 500 ग्राम तक पहुंच चुकी हैं।

इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों के सामने खेती के साथ मत्स्य पालन के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर तैयार हुआ है।

एक ही जल संरचना अब तीन स्तरों पर उपयोगी साबित हो रही है—बारिश के पानी का संरक्षण, सिंचाई में उपयोग और मत्स्य पालन से अतिरिक्त आय।

2.30 लाख रुपये की स्वीकृति, आजीविका से जोड़ा गया फार्म पॉन्ड

इस पहल के तहत एक फार्म पॉन्ड के लिए करीब 2.30 लाख रुपये की स्वीकृति के साथ जल संरचनाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम किया गया है।

वहीं ABIS CSR के सहयोग से ग्रामीणों को तकनीकी प्रशिक्षण, सब्सिडी पर आहार और सतत मॉनिटरिंग जैसी सहायता दी जा रही है। इसका उद्देश्य हितग्राहियों को मत्स्य पालन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देना और बेहतर प्रबंधन के जरिए उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ाना है।

आदिवासी अंचल में जल संरक्षण से आजीविका तक का मॉडल

कुकरेल क्षेत्र की यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

बारिश के दौरान बह जाने वाले पानी को फार्म पॉन्ड में रोकने से स्थानीय जल संरचनाएं तैयार हुई हैं। इन्हीं संरचनाओं का उपयोग मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए खेती के साथ आय के अतिरिक्त विकल्प विकसित करने की संभावना बनी है।

यह मॉडल इस सोच को भी मजबूत करता है कि ग्रामीण विकास के लिए केवल बड़े जलाशय या बड़ी परियोजनाएं ही जरूरी नहीं हैं। स्थानीय जरूरत के अनुसार तैयार छोटी जल संरचनाओं का योजनाबद्ध उपयोग भी आजीविका में बदलाव ला सकता है।

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कुकरेल की डबरियां दे रही हैं जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता का संदेश

कुकरेल की कहानी का सबसे अहम पहलू यही है कि यहां बारिश के पानी को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है।

वीबी-जी रामजी योजना के तहत बने फार्म पॉन्ड पानी को सहेजने के साथ खेती और मत्स्य पालन से जुड़ रहे हैं। 200 से अधिक फार्म पॉन्ड का यह प्रयास आने वाले समय में जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका के एकीकृत मॉडल के रूप में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

कुकरेल में अब डबरियां सिर्फ पानी रोकने की संरचनाएं नहीं हैं। इनके जरिए जल संरक्षण, खेती और अतिरिक्त आय को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है—और यही इस पहल की सबसे बड़ी खासियत है।

कुकरेल फार्म पॉन्ड मॉडल की प्रमुख बातें

योजना: वीबी-जी रामजी योजना

स्थान: कुकरेल क्लस्टर, नगरी विकासखंड, धमतरी

फार्म पॉन्ड: 200 से अधिक

डबरी का आकार: करीब 20×20×3 मीटर

मुख्य उद्देश्य: वर्षा जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन

मत्स्य गतिविधि: आईएमसी और झींगा पालन

प्रति डबरी मत्स्य बीज: करीब 320 आईएमसी + 1600 झींगा

आईएमसी की वर्तमान स्थिति: करीब 400–500 ग्राम तक

स्वीकृति: करीब 2.30 लाख रुपये प्रति फार्म पॉन्ड

तकनीकी सहयोग: ABIS CSR के माध्यम से प्रशिक्षण, आहार सहयोग और मॉनिटरिंग

FAQs

Q1. वीबी-जी रामजी योजना के तहत कुकरेल में क्या काम हुआ है?

वीबी-जी रामजी योजना के तहत कुकरेल क्लस्टर में 200 से अधिक फार्म पॉन्ड यानी डबरियों का निर्माण किया गया है। इनका उद्देश्य वर्षा जल को स्थानीय स्तर पर संरक्षित करना और उसे आजीविका गतिविधियों से जोड़ना है।

Q2. कुकरेल फार्म पॉन्ड में कौन-कौन सी गतिविधियां हो रही हैं?

इन फार्म पॉन्ड में जल संरक्षण के साथ आईएमसी और झींगा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Q3. कुकरेल फार्म पॉन्ड से किसानों को क्या फायदा है?

फार्म पॉन्ड से बारिश के पानी को संरक्षित करने और सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। साथ ही मत्स्य पालन के जरिए अतिरिक्त आय का अवसर भी विकसित हो रहा है।

Q4. प्रत्येक फार्म पॉन्ड का आकार कितना है?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रत्येक फार्म पॉन्ड का आकार करीब 20 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर है।

Q5. कुकरेल में मछली पालन के लिए कितने बीज डाले गए हैं?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रत्येक डबरी में करीब 320 आईएमसी और 1600 झींगा के बीज डाले गए हैं।

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